
नई दिल्ली । यदि आज आप धीमे इंटरनेट की समस्या से जूझ रहे हैं, तो इसका कारण आपके वाई-फाई में नहीं, बल्कि लाल सागर की गहराइयों में छिपा है। लाल सागर में समुद्र के नीचे बिछी कई महत्वपूर्ण ऑप्टिकल फाइबर केबलों के क्षतिग्रस्त हो जाने से वैश्विक इंटरनेट की गति पर भारी असर पड़ा है, जिससे दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। इस घटना के पीछे एक बड़ी साजिश की आशंका जताई जा रही है, जिसमें शक की सुई यमन के हूती विद्रोहियों की ओर घूम रही है।ये केबलें यूरोप और एशिया के बीच एक डिजिटल हाईवे के रूप में काम करती हैं, जिनसे दुनिया का लगभग 17त्न इंटरनेट ट्रैफिक होकर गुजरता है। इनके क्षतिग्रस्त होने से भारत और पाकिस्तान समेत कई देशों में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज टेक कंपनियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि उनकी एज़्योर क्लाउड सेवाओं पर, विशेषकर एशिया और यूरोप के बीच, व्यापक प्रभाव पड़ा है। इंटरनेट की निगरानी करने वाली संस्था नेटब्लॉक्स ने भी इस गड़बड़ी की पुष्टि करते हुए बताया है कि इसका असर टाटा कम्युनिकेशंस द्वारा संचालित केबल सिस्टम पर भी पड़ा है।
फिलहाल, इन केबलों के क्षतिग्रस्त होने का सटीक कारण पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे महज एक दुर्घटना मानने से इनकार कर रहे हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह वैश्विक कनेक्टिविटी को बाधित करने के लिए एक जानबूझकर की गई कार्रवाई है, और इस संदेह के केंद्र में यमन के हूती विद्रोही हैं। यह माना जा रहा है कि गाजा में चल रहे संघर्ष के बीच इज़रायल पर दबाव बनाने के उद्देश्य से इन केबलों को निशाना बनाया गया है। हूती विद्रोहियों का पिछला रिकॉर्ड भी इस संदेह को और पुख्ता करता है, क्योंकि उन्होंने नवंबर 2023 से लाल सागर में 100 से अधिक जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। इसके अलावा, 2024 की शुरुआत में यमन की सरकार ने भी चेतावनी जारी की थी कि हूती विद्रोही इन महत्वपूर्ण केबलों पर हमला करने की योजना बना रहे हैं, जिससे इस घटना के एक सुनियोजित हमला होने की आशंका और भी बढ़ जाती है। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने पहले ऐसे आरोपों का खंडन किया था, लेकिन रविवार सुबह उनके अपने समाचार चैनल ने केबलों के कटने की खबर को स्वीकार कर लिया। वर्तमान में, डेटा ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ा जा रहा है, लेकिन इन क्षतिग्रस्त केबलों की मरम्मत में लंबा समय लग सकता है, जिससे आने वाले दिनों में भी इंटरनेट की गति प्रभावित रहने की आशंका है।







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